Saturday, August 13, 2011

प्रायश्चित

    प्रायश्चित 


  शर्मिंदा थी हमारी पीढ़ी
  कि समाज को हम सही दिशा दे ने सके  
  भौतिक प्रगति की राह पर भटक गये हम
  विचारिक प्रगति पर ध्यान दे न सके
  पर बचाने को हमे शर्मिंदगी से
  अन्ना ह्ज्जारे आये है
  दिखाने को राह भटके समाज को
  एक नव चेतना की मशाल लाये है
  उठो नौजवानों थामो इस मशाल को
  अब इसे आगे बढाने की जिम्मेदारी तुम्हारी है
  जब पूछेगा इतिहास तुमसे
  की जब हो रही थी  न्याय और अन्याय में जंग 
  तब तुम खड़े थे किसके संग
  ये देने को जवाब अब तुम्हारी बारी है
  याद रखो ! अन्ना एक व्यक्ति नही सिद्धांत है
  मिट जाते है लोग, मिट जाती है सल्तनते
  पर सिद्धांत कभी मिटा नही करते
  चले जाते है  लोग
  आ जाते  है कुछ और
  पर सचाई के कारवां कभी रुका नही करते  
  कल अगर न रहे एक अन्ना तो क्या  
  करोड़ो अन्ना पैदा करने की
  जिम्मेदारी भी अब तुम्हारी है  II

  लेखक प्रवीन चन्द्र झांझी  

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