Friday, August 12, 2011

मर्जी तुम्हारी

    इंसान करता है
   पीढ़िया भुगतती है
   सदिया बीतती है
   इतिहास बोलता है
  आज दोराहे पर खड़े है 
  करो फैसला किधर जाना है
  बनना है इतिहास पुरुष
  या कायर कहलाना है II

लेखक प्रवीन चन्द्र झांझी


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