Monday, October 17, 2011


निर्णय

जिन्दगी में कई ऐसे क्षण भी आते है
जब जिन्दगी और मौत आमने सामने खड़े हो जाते है
अक्सर इन्सान जाता है जिन्दगी के साथ
और फिर कुछ देर बाद
वैसे ही मुकाम पर फिर आकर खड़ा हो जाता है
मगर है ऐसी महबूबा  मौत 
 अगर चला जाए वो साथ उसके
तो वापिस वो पास जिन्दगी के कभी नही आता है

लेखक प्रवीन चन्द्र झांझी

Monday, October 10, 2011

दुनिया

दुनिया वालो को कहना तो बहुत कुछ था मगर
अब कुछ कहना नही चाहता
गुस्सा अपनों पर किया जाता है
इसलिए अब किसी पर गुस्सा नही आता
दुनिया और वेश्या के कोठे में फर्क नही है ज्यादा
समझ पाता है इंसान जब तक 
तब तक वो उस कोठे पर चढने के काबिल नही रहता
आम तौर पर बनते है कोठे उपर
क्योंकि वंहा तक पहुँचने के बाद
वो और नीचे गिर नही पाता
कहना तो बहुत कुछ था मगर ..............

लेखक  प्रवीन चन्द्र झांझी

Tuesday, October 4, 2011

क्षमा

आज सुबह एक सपना देखा
कहते है की सुबह का सपना सच्चा होता है
देखा की मेरा बेटा मेरे मुह में आग दे रहा है
मेरी माँ ने आकर मेरा हाथ थाम लिया है
शायद आज के हालात में
इससे अच्छा मेरे लिए कुछ हो नही सकता
अगर कोई चाहे भी तो
वापिस अब मुझे दुनिया में वापिस ला नही सकता
क्योंकि अब इस दुनिया से
मेरे दिल बुरी तरह उकता गया है
जिस चेहरे की तरफ देखो
हर कोई एक नकाब ओढ़े खड़ा है
हर शख्स अपनी
कुत्सित इच्छाओ और तमनाओ से घिरा
अपने स्वार्थो के दलदल में फंसा है
अब इन जहरीली हवाओ में
सांस भी कंहा आता है
हर तरफ हवाओं में
षड्यंत्र और नफरत का जहर भरा है
ऐसे में है ये प्रार्थना कि
जगत के मालिक अब तो मुझे वापिस बुला ले
बहुत कर चुका में अपने कर्मो का भुगतान
मेरे शेष अपराधो को अब तो क्षमा कर दे II

लेखक   प्रवीन चन्द्र झांझी