Sunday, March 4, 2012

हालात

कहते है लोग की शराब आदमी को तमीज भुला देती है,
मगर सच तो ये है कि ये वो माशूक है जो
कुछ पल के लिए ही सही पर
अपनी जिन्दगी अपने हिसाब से जीने का समा बना देती है,

जमाना जो न करता बेवफाई 
तो शराब कि जरूरत ही क्यों पडती 
करती हर शाम हमारा खड़ी होकर चौखट पर इन्तजार 
तो हमारी मयखाने कि इस लालपरी पर नजर ही क्यों पडती 

कहते है लोग कि न होती शराब
तो जमाने में ये बुराईया न होती
कहता हूँ मै कि जो न होती बुराईया जमाने में 
तो शराब पीने कि नौबत न आती 

बुराई शराब में नही 
बुराई इस बात में है कि इंसान कि नीयत में खोट है 
नही मिटा पाते अपने अंदर की नफरत को 
उठाकर ऊँगली दूसरे की तरफ 
असलियत से लेते मुंह मोड़ है

अब छोड़ो मत सोचो कि
पहले अंडा आया या मुर्गी आई
और इस बहस में मत उलझो
न करो शराब से और शराबी से नफरत ,
क्यों पीता है आदमी शराब उन हालात को बदलो II

लेखक :  प्रवीन चन्द्र झांझी   
    

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